छन्द और लय

पित्रसत्तात्मक समाज

रिश्तों की छांव, स्नेह के धागों और शिव-शक्ति व राधा-कृष्ण के प्रतीकों के माध्यम से परिवार और समाज में पुरुष-स्त्री के पूरक संबंधों की नई परिभाषा तलाशती एक गहरी कविता—’पित्रसत्तात्मक समाज’।”

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किस्सागोई

ग्रीक देश की पुजारिन

अतिशय महत्वाकांक्षा, सुंदर भविष्य की ऊँची चाह और आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपनों व खुद को खोती एक लड़की की मर्मस्पर्शी कहानी—’ग्रीक देश की पुजारिन’।”

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छन्द और लय

विद्यार्थी जीवन

डिग्रियों की अंधी दौड़, नींद और जवानी की कीमत पर बिकते सपनों के बीच शिक्षा और बाजारवाद के कड़वे सच को बयान करती एक मार्मिक कविता—’विद्यार्थी जीवन’।

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tuki
किस्सागोई

टुकी

अहंकार, आत्मसम्मान और जीवन के संघर्षों के बीच उलझी एक आधुनिक स्त्री और एक घरेलू कामगार ‘टुकी’ के जीवन के जरिए रिश्तों के वास्तविक अर्थ को तलाशती एक मर्मस्पर्शी कहानी—’टुकी’।”

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किस्सागोई

खबर ये सच है क्या?

बदलते वक्त, आधुनिक शोरगुल और प्रकृति से दूर होती इंसानी दुनिया के बीच क्या सचमुच वसंत और खुशियाँ अब भी बाकी हैं? यथार्थ और उम्मीद पर सवाल उठाती एक मार्मिक कविता—’खबर सच है क्या?’।”

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khushkismat
किस्सागोई

खुशकिस्मत

सफलता की दौड़ में बड़े-बड़े बंगले और डिग्रियाँ तो हासिल हो जाती हैं, पर क्या अपनों का साथ और सुकून भी नसीब होता है? सफलता, महत्वाकांक्षा और रिश्तों के अंतर्द्वंद पर आधारित एक मर्मस्पर्शी कहानी—’खुशकिस्मत’।”

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छन्द और लय

वकील साहब की कविता (व्यंग्य)

वकीलों की दुनिया, कम होते मुकदमों और सामाजिक व्यवस्था के विरोधाभास पर तीखा और मजेदार कटाक्ष करती एक व्यंग्यात्मक कविता—’वकील साहब की कविता’।”

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muawja
किस्सागोई

मुआवजा

रिश्ता बनाने, निभाने और खत्म करने की कीमत तो सब चुकाते हैं, पर क्या मौत के बाद रिश्तों की कीमत बढ़ जाती है? मध्यमवर्गीय जीवन, पारिवारिक उलझनों और रिश्तों के विरोधाभास पर आधारित एक मर्मस्पर्शी और व्यंग्यात्मक कहानी—’मुआवजा’।”

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छन्द और लय

नवरात्रि में माँ, कृपा बनाए रखना

नवरात्रि में माँ, कृपा बनाए रखनानवरात्रि की पावन बेला, जगमग हो माँ, जीवन मेरा। तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, भक्ति

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छन्द और लय

ट्रैफिक जाम

भागदौड़ भरी जिंदगी, सड़क की व्यस्तता और मोबाइलों में सिमटती इंसानी दुनिया के बीच हर आदमी की अपनी उलझन और व्यवस्था पर कटाक्ष करती एक जीवंत कविता—’ट्रैफिक जाम’।”

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soundarya ka bajarwad
भाव-प्रवाह

सौंदर्य का बाज़ारवाद: क्या पार्लर और ब्यूटी ब्रांड तय कर रहे हैं हमारी सुंदरता की परिभाषा?

क्या हमारी सुंदरता हमारी अपनी पसंद है या बाज़ार की असुरक्षाओं का व्यापार? जानिए एक ब्यूटी पार्लर के अनुभव से उपजी गहरी वैचारिक पड़ताल।

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आलेख

विनायक से गणेश: शक्ति, विवेक और पारिवारिक पूरकता का सनातन संदेश

सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना हाल ही में हमने गणेश चतुर्थी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से मनाया

विनायक से गणेश: शक्ति, विवेक और पारिवारिक पूरकता का सनातन संदेश Read Post »

आलेख

भारत में लापता बच्चे: यथार्थ, कानूनी प्रावधान और त्वरित उपाय

सितंबर 2026 बबीता झा कुछ समय पूर्व मीडिया में यह खबर प्रमुखता से आई कि दिल्ली में बड़ी संख्या में

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आलेख

मांसपेशियों का दर्द (Myalgia): कारण, गंभीरता, आँकड़े और बचाव के उपाय

सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, काम का दबाव और शारीरिक गतिविधियों में असंतुलन के कारण आज

मांसपेशियों का दर्द (Myalgia): कारण, गंभीरता, आँकड़े और बचाव के उपाय Read Post »

आलेख

सकारात्मक सोच: जीवन को समृद्ध और सफल बनाने की कुंजी

सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना “मन के जीते जीत है, मन के हारे हार।” यह पुरानी कहावत मानव जीवन के

सकारात्मक सोच: जीवन को समृद्ध और सफल बनाने की कुंजी Read Post »

आलेख

डॉ. विक्रम साराभाई: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के स्वप्नद्रष्टा और महान वैज्ञानिक

सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इतिहास में डॉ. विक्रम साराभाई का नाम एक ऐसे महान

डॉ. विक्रम साराभाई: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के स्वप्नद्रष्टा और महान वैज्ञानिक Read Post »

धरोहर

मुंशी प्रेमचंद: हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक और ‘उपन्यास सम्राट’

सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना हिंदी साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान उस देदीप्यमान सूर्य के समान है,

मुंशी प्रेमचंद: हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक और ‘उपन्यास सम्राट’ Read Post »

किस्सागोई

गड्ढों पर विस्तृत विवेचन और मरी-मरी बारिश? (व्यंग्य)

सितंबर 2026 बरसात बाद में आती है, गड्ढे पहले आ टपकते हैं। फिर बारिश की बूंदें रो-रोकर गिरती हैं और

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