पित्रसत्तात्मक समाज
रिश्तों की छांव, स्नेह के धागों और शिव-शक्ति व राधा-कृष्ण के प्रतीकों के माध्यम से परिवार और समाज में पुरुष-स्त्री के पूरक संबंधों की नई परिभाषा तलाशती एक गहरी कविता—’पित्रसत्तात्मक समाज’।”
रिश्तों की छांव, स्नेह के धागों और शिव-शक्ति व राधा-कृष्ण के प्रतीकों के माध्यम से परिवार और समाज में पुरुष-स्त्री के पूरक संबंधों की नई परिभाषा तलाशती एक गहरी कविता—’पित्रसत्तात्मक समाज’।”
आज मेरी प्रतीक्षा रिमझिम बनी बरसात की तुमसे मिलने को आकुल अधखुले मेरे ये नैन, जल भरे हो जाते हैं
हिंदी की गौरव गाथा कोई साधारण कथा नहीं है, यह उस मिट्टी की महागूँज है जिसने हमें जन्म दिया, और
भाषा और संस्कृति: मानवीय सभ्यता का शाश्वत अंतःसंबंध एवं विकासात्मक सेतु है। प्रस्तावना मानव सभ्यता के विकास की यात्रा
अतिशय महत्वाकांक्षा, सुंदर भविष्य की ऊँची चाह और आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपनों व खुद को खोती एक लड़की की मर्मस्पर्शी कहानी—’ग्रीक देश की पुजारिन’।”
डिग्रियों की अंधी दौड़, नींद और जवानी की कीमत पर बिकते सपनों के बीच शिक्षा और बाजारवाद के कड़वे सच को बयान करती एक मार्मिक कविता—’विद्यार्थी जीवन’।
ऋचा सिंह नौ दिनों तक घर-घर में, होती देवी की आराधना है, माथों पर श्रद्धा का उजास, हाथों में सुमनों
बदलते वक्त, आधुनिक शोरगुल और प्रकृति से दूर होती इंसानी दुनिया के बीच क्या सचमुच वसंत और खुशियाँ अब भी बाकी हैं? यथार्थ और उम्मीद पर सवाल उठाती एक मार्मिक कविता—’खबर सच है क्या?’।”
हे माँ दुर्गा, लाज रखना, चरणों में अपने स्थान रखना। जब भी डगमगाऊँ राहों में, सिर पर अपना हाथ रखना॥
वकीलों की दुनिया, कम होते मुकदमों और सामाजिक व्यवस्था के विरोधाभास पर तीखा और मजेदार कटाक्ष करती एक व्यंग्यात्मक कविता—’वकील साहब की कविता’।”
नवरात्रि में माँ, कृपा बनाए रखनानवरात्रि की पावन बेला, जगमग हो माँ, जीवन मेरा। तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, भक्ति
भागदौड़ भरी जिंदगी, सड़क की व्यस्तता और मोबाइलों में सिमटती इंसानी दुनिया के बीच हर आदमी की अपनी उलझन और व्यवस्था पर कटाक्ष करती एक जीवंत कविता—’ट्रैफिक जाम’।”
क्या हमारी सुंदरता हमारी अपनी पसंद है या बाज़ार की असुरक्षाओं का व्यापार? जानिए एक ब्यूटी पार्लर के अनुभव से उपजी गहरी वैचारिक पड़ताल।
पितृपक्ष आया है, पापा, और आपकी याद फिर आँखों में उतर आई है। जब दर्द से टूट रही थी, आपने
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना हाल ही में हमने गणेश चतुर्थी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से मनाया
विनायक से गणेश: शक्ति, विवेक और पारिवारिक पूरकता का सनातन संदेश Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा कुछ समय पूर्व मीडिया में यह खबर प्रमुखता से आई कि दिल्ली में बड़ी संख्या में
भारत में लापता बच्चे: यथार्थ, कानूनी प्रावधान और त्वरित उपाय Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, काम का दबाव और शारीरिक गतिविधियों में असंतुलन के कारण आज
मांसपेशियों का दर्द (Myalgia): कारण, गंभीरता, आँकड़े और बचाव के उपाय Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना “मन के जीते जीत है, मन के हारे हार।” यह पुरानी कहावत मानव जीवन के
सकारात्मक सोच: जीवन को समृद्ध और सफल बनाने की कुंजी Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इतिहास में डॉ. विक्रम साराभाई का नाम एक ऐसे महान
डॉ. विक्रम साराभाई: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के स्वप्नद्रष्टा और महान वैज्ञानिक Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना हिंदी साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान उस देदीप्यमान सूर्य के समान है,
मुंशी प्रेमचंद: हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक और ‘उपन्यास सम्राट’ Read Post »
सितंबर 2026 सतवंत कौर और निमरत कौर में गहरी मित्रता थी। दोनों का दिन एक-दूसरे से मिले बिना पूरा न
सितंबर 2026 बचपन के वे दिन भी कितने अजीब और खूबसूरत होते हैं, जब हमारी सादगी के पीछे एक नटखट
सितंबर 2026 आज की दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है। तकनीक ने जीवन को सरल, सुविधाजनक और गतिशील बनाया
सितंबर 2026 सुबह की चाय के साथ अख़बार पढ़ते दादा जी को देखकर पोती मुस्कुराते हुए कहती है— “Good Morning,
सितंबर 2026 घुमंतू उस दिन मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा था। भीतर घंटों की आवाज़ थी, बाहर भीड़ का शोर।
सितंबर 2026 शरदनाथ खरे साहब ने ऑफिस के बाहर निकलते ही भीड़, हल्ला और हुड़दंग देखा। उनका मन यह सब
सितंबर 2026 शाम को छत पर बैठे दादा रामनाथ अखबार पढ़ रहे थे। पास ही बैठा पोता जिज्ञासु अपने फोन
सितंबर 2026 बरसात बाद में आती है, गड्ढे पहले आ टपकते हैं। फिर बारिश की बूंदें रो-रोकर गिरती हैं और
गड्ढों पर विस्तृत विवेचन और मरी-मरी बारिश? (व्यंग्य) Read Post »
सितंबर 2026 उछल ताल से मेंढक आया, जोर-जोर से वह टर्राया।। फुदक-फुदक सबके घर पहुँचा, दरवाजे पर वह चिल्लाया।। आओ
सितंबर 2026 राखी भेज रहा हूँ बहना, तुमको ही इस बार, रक्षा-वचन निभा देना, तुम पर ही परिवार! इस बार
सितंबर 2026 इनके शब्द बहुत कम हैं, पर भाव बहुत गहरे हैं; बातें इनकी छोटी हैं, पर रिश्ते इनके सहेजे
सितंबर 2026 संस्कार की बात करो ना, चारों तरफ़ छा गई निराशा, बदला-बदला गाँव-देश अब, कहूँ क्या नई पीढ़ी की
सितंबर 2026 ओढ़ ली खामोशी मैंने, किसी हथियार के रूप में नहीं; बस अपने बचाव के लिए, महसूस हो रहे